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कोई सबूत नहीं, कोई भारतीय लिंक नहीं: निज्जर हत्याकांड की असली कहानी


18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारे के बाहर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या ने भारत और कनाडा के संबंधों में भारी तनाव पैदा कर दिया था। हालांकि, इस मामले में भारतीय राज्य की संलिप्तता का कोई प्रमाण कभी सामने नहीं आया। भारत ने शुरुआत से ही इस आरोप को दृढ़ता से खारिज किया और अब कनाडाई तथा अमेरिकी जांच एजेंसियों से जुड़े घटनाक्रम इस रुख को मजबूत करते दिखाई दे रहे हैं।


8 जुलाई 2026 को अमेरिकी अधिकारियों ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर इस हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए। यह कार्रवाई भारत आधारित संगठित अपराध सिंडिकेट्स के खिलाफ एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा थी, जिन पर ड्रग तस्करी, जबरन वसूली, सुपारी हत्या और आपराधिक नेटवर्क चलाने जैसे आरोप हैं। अमेरिकी आरोप पत्र में किसी भी भारतीय सरकारी अधिकारी या एजेंट का नाम शामिल नहीं है।


कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (CBC) से बातचीत में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने कहा कि संगठित अपराध नेटवर्क की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जो भारतीय सरकार के अधिकारियों को इस हत्या से जोड़ता हो। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया जो भारतीय सरकार को जोड़ता हो।” यह स्थिति 2024 में कनाडा में गिरफ्तार किए गए चार भारतीय नागरिकों के मामले से भी मेल खाती है, जिन्हें इस हत्या में प्रथम श्रेणी की हत्या और साजिश के आरोपों का सामना करना पड़ा। ये लोग बिश्नोई गैंग से जुड़े आपराधिक तत्व बताए गए, न कि किसी सरकारी अभियान का हिस्सा।


ट्रूडो का जल्दबाजी में भारत पर आरोप: राजनीतिक लाभ के लिए लगाए गए बेबुनियाद आरोप

सितंबर 2023 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से “विश्वसनीय आरोपों” का उल्लेख करते हुए निज्जर हत्या में भारतीय सरकार की संभावित भूमिका की बात कही थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बड़ा कूटनीतिक विवाद पैदा हुआ, जिसमें राजनयिकों का निष्कासन और संबंधों में गिरावट शामिल थी। हालांकि, भारत द्वारा बार-बार सबूत मांगने के बावजूद कनाडा सार्वजनिक रूप से कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। बाद में ट्रूडो ने एक संसदीय गवाही में स्वीकार किया कि उनके दावे मुख्य रूप से खुफिया जानकारी पर आधारित थे, न कि “ठोस प्रमाणों” पर।


यह रुख घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित दिखाई दिया, जिसमें कनाडा की सिख डायस्पोरा राजनीति और गठबंधन की मजबूरियां शामिल थीं। तथ्यों और अपराध की वास्तविक प्रकृति पर ध्यान देने के बजाय एक राजनीतिक कथा को प्राथमिकता दी गई, जिससे भारत-कनाडा संबंधों को अनावश्यक नुकसान पहुंचा।


निज्जर: “शहीद” की छवि बनाम वास्तविकता

कुछ खालिस्तान समर्थक समूहों और कुछ गुरुद्वारों द्वारा अभी भी निज्जर को “शहीद” बताया जाता है और हत्या में कथित भारतीय भूमिका की जांच की मांग की जाती है। हालांकि, उपलब्ध जांच और घटनाक्रम इस मामले को आपराधिक नेटवर्क और गैंग गतिविधियों से जोड़ते नजर आते हैं।


यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह पूरे सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता। कनाडा, भारत और दुनिया भर में रहने वाले अधिकांश सिख कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, जो समाज में सकारात्मक योगदान देते हैं, हिंसा को अस्वीकार करते हैं और अलगाववादी या आपराधिक गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं है। सिख समुदाय में सफल पेशेवर, उद्यमी और देश के प्रति समर्पित लोग शामिल हैं। भारत में सिख समुदाय ने सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक योगदान दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री का पद भी शामिल है। कट्टरपंथी खालिस्तानी तत्व एक छोटा वर्ग हैं, जो शिकायतों और भावनाओं का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करते हैं और उन्हें पूरे सिख समुदाय से जोड़ना गलत है।


निज्जर खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में एक प्रमुख चेहरा था। भारत सरकार ने उसे अपने कानूनों के तहत आतंकवादी घोषित किया था और उस पर भारत में हिंसा तथा अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए थे। निज्जर ने इन आरोपों से इनकार किया था और अपने कार्यों को शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति बताया था।


असली संदर्भ: ब्रिटिश कोलंबिया में गैंग युद्ध और पंजाबी आपराधिक नेटवर्क

जांच से संकेत मिलता है कि निज्जर की हत्या संगठित अपराध की दुनिया से जुड़ी हिंसक गतिविधियों का हिस्सा थी। बिश्नोई सिंडिकेट, जिसे कनाडा ने 2025 में आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया था, पर सीमा पार ड्रग तस्करी, प्रवासी समुदायों को निशाना बनाकर जबरन वसूली और डर पैदा करने के लिए लक्षित हिंसा जैसे आरोप हैं।ऐसी हाई-प्रोफाइल घटनाएं कथित रूप से इन आपराधिक नेटवर्कों के प्रभाव और डर को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती रही हैं।


ब्रिटिश कोलंबिया में पंजाबी मूल के कुछ आपराधिक नेटवर्क लंबे समय से ड्रग व्यापार, जबरन वसूली और गैंग प्रतिद्वंद्विता से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध सबूत निज्जर की हत्या को इन्हीं आपराधिक गतिविधियों से जोड़ते हैं, न कि किसी विदेशी सरकार की साजिश से। भारत को दोषी ठहराने से उन वास्तविक आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई से ध्यान भटकता है, जो कानून का पालन करने वाले लोगों और प्रवासी समुदायों के लिए खतरा पैदा करते हैं।


भारत का रुख सही साबित हुआ: नए घटनाक्रमों से मजबूत हुई स्थिति

भारत ने शुरुआत से ही कहा था कि निज्जर हत्या में उसकी कोई भूमिका नहीं है और उसने लगातार सबूतों की मांग की थी। अब RCMP की जांच में भारतीय सरकार से कोई संबंध न मिलना, अमेरिकी आरोपों में केवल आपराधिक तत्वों का नाम आना और पहले की गिरफ्तारियों में गैंग से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आना भारत के रुख के अनुरूप दिखाई देता है।


ये घटनाक्रम निष्पक्ष जांच और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोग का परिणाम हैं, न कि किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक समर्थन का। कनाडा के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों और संगठित अपराध के लिए न होने दे, जो उसके अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।


अलगाववादी एजेंडा चलाने वाले कट्टरपंथी तत्व और साजिश आधारित कथाएं पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। अधिकांश सिख लोग शांति, परिवार, धार्मिक मूल्यों और समृद्धि को प्राथमिकता देते हैं। न्याय का अर्थ वास्तविक अपराधियों को सजा देना है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी देश या समुदाय को दोषी ठहराना। अब सामने आए तथ्यों से स्पष्ट होता है कि असली ध्यान उन आपराधिक नेटवर्कों पर होना चाहिए जो हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, न कि बेबुनियाद भू-राजनीतिक आरोपों पर।


लेखक: डॉ. मोहित शर्मा

(वह देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) में सहायक प्रोफेसर हैं। डॉ. शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएच.डी. की है और उनका शोध क्षेत्र पाकिस्तान में संघवाद तथा दक्षिण एशियाई राजनीति पर केंद्रित है।)

 
 
 

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