चंडीगढ़ में IED साजिश नाकाम: विस्फोटक और हथियार के साथ तीन BKI ऑपरेटिव गिरफ्तार
- SikhsForIndia

- 20 घंटे पहले
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चंडीगढ़, 24 अगस्त 2026: चंडीगढ़ पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर एक IED साजिश को नाकाम किया है। आरोपियों के पास से एक संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस, एक हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई है। पुलिस स्टेशन 36, चंडीगढ़ में FIR दर्ज की गई है और मामले के पीछे मौजूद नेटवर्क की जांच के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। तीनों आरोपियों की पहचान लवप्रीत सिंह (19), जशनदीप सिंह (21) और प्रभप्रीत सिंह (19) के रूप में हुई है। पुलिस जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीनों के संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से थे और वे विदेश में मौजूद एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहे थे।
बरामदगी में करीब 5 किलो जिलेटिन स्टिक विस्फोटक, एक डेटोनेटर, पावर सोर्स, रिमोट ट्रिगरिंग मैकेनिज्म, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस शामिल हैं। विस्फोटक सामग्री चंडीगढ़ के सेक्टर 43 इंटर-स्टेट बस टर्मिनस के आसपास से बरामद की गई, जो शहर के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन केंद्रों में से एक है। पुलिस कार्रवाई ने विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल को रोक दिया और साजिश को अंजाम दिए जाने से पहले तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।
विदेश में बैठे BKI हैंडलर की भूमिका की जांच
जांच में सतनाम सिंह उर्फ सत्ता नौशेरा की पहचान इस मामले से जुड़े विदेश में मौजूद हैंडलर के रूप में हुई है। चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी उसके संपर्क में थे और उन्हें चंडीगढ़ में आतंक फैलाने के उद्देश्य से IED लगाने का निर्देश दिया गया था। इस कारण जांच का दायरा केवल तीन गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां विस्फोटकों और हथियार के स्रोत, आरोपियों और उनके हैंडलर के बीच संपर्क, वित्तीय एवं लॉजिस्टिक सहायता तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगा रही हैं।
पुलिस उस सटीक स्थान का भी पता लगा रही है जहां विस्फोटक उपकरण लगाया जाना था। हालांकि बरामदगी सेक्टर 43 बस स्टैंड के पास हुई है, लेकिन अधिकारियों ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि ISBT ही इसका निर्धारित निशाना था।
सेक्टर 43 के पास बरामदगी से गंभीर सुरक्षा चिंता
बरामदगी का स्थान इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। सेक्टर 43 ISBT एक प्रमुख अंतरराज्यीय परिवहन केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है और जो चंडीगढ़ को पड़ोसी राज्यों से जोड़ता है। इतने व्यस्त सार्वजनिक क्षेत्र के आसपास विस्फोटक सामग्री और हथियार की मौजूदगी गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। ऑपरेशन के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है और आवश्यक निवारक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
पुलिस ने साथ ही लोगों को आश्वस्त किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और बरामद सामग्री को सुरक्षित कर लिया गया है। ऑपरेशन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की पहचान के लिए जांच जारी है।
आरोपियों की उम्र सिर्फ 19, 21 और 19 वर्ष
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू आरोपियों की कम उम्र है। लवप्रीत सिंह 19 वर्ष, जशनदीप सिंह 21 वर्ष और प्रभप्रीत सिंह केवल 19 वर्ष का है। इन गिरफ्तारियों ने युवाओं के कट्टरपंथीकरण और चरमपंथी नेटवर्क द्वारा उनकी भर्ती के मुद्दे को फिर गंभीरता से सामने ला दिया है। यह मामला उस सुरक्षा चुनौती को रेखांकित करता है जिसमें विदेश में बैठे हैंडलर युवाओं से संपर्क स्थापित कर उन्हें विस्फोटकों और हथियारों से जुड़े ऑपरेशनों के लिए इस्तेमाल करते हैं।
इस मामले की जांच न केवल मौजूदा नेटवर्क को तोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि यह समझने में भी मदद करेगी कि युवाओं की भर्ती, उनसे संपर्क और उन्हें निर्देश देने के लिए किस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
व्यापक सुरक्षा चुनौती का हिस्सा
चंडीगढ़ और पंजाब में पहले भी विस्फोटकों, ग्रेनेड, हथियारों और विदेश में मौजूद हैंडलरों के निर्देश पर काम करने वाले कथित मॉड्यूल से जुड़े मामले सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों की जांच करती रही हैं जिनमें विदेश में मौजूद चरमपंथी और आपराधिक नेटवर्क स्थानीय ऑपरेटिव का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए करते हैं।
ताजा मामला विदेश में मौजूद चरमपंथी हैंडलरों, संगठित आपराधिक नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और युवाओं की भर्ती के बीच संबंधों को लेकर चिंताओं को और मजबूत करता है। यह तरीका सुरक्षा एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती पेश करता है। ऑपरेशन को निर्देशित करने वाले लोग भारत से बाहर रह सकते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर भर्ती किए गए लोग रेकी, लॉजिस्टिक्स, हथियार और विस्फोटकों से जुड़े काम संभालते हैं।
अंजाम दिए जाने से पहले बड़ी साजिश नाकाम
चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई ने एक गंभीर सुरक्षा खतरे को आगे बढ़ने से रोक दिया। तीन आरोपी हिरासत में हैं, विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है, हथियार और गोला-बारूद जब्त किए गए हैं और कथित विदेशी कनेक्शन की जांच जारी है। जांच के अगले चरण में पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एजेंसियां विस्फोटकों के स्रोत, कम्युनिकेशन चेन, लॉजिस्टिक सहायता और आरोपियों से जुड़े अन्य सहयोगियों का पता लगा रही हैं। यह मामला पंजाब और चंडीगढ़ के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। आरोपियों की उम्र महज 19 से 21 वर्ष होना युवाओं के कट्टरपंथीकरण और चरमपंथी नेटवर्क में उनकी भर्ती के खतरे पर गंभीर और निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
एक गंभीर सुरक्षा घटना का रूप ले सकने वाली इस साजिश को अंजाम दिए जाने से पहले रोक दिया गया। गिरफ्तारियों से तत्काल खतरा टल गया है, लेकिन इस ऑपरेशन के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है।



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