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कैसे पंजाब पुलिस ने मलेशिया से संचालित खालिस्तानी आतंकी फंडिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया!


जून 2026 में पंजाब पुलिस ने एक ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। मलेशिया से प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े दो कथित ऑपरेटिवों की भारत वापसी केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि उस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क का खुलासा भी है, जो पंजाब में आतंकी गतिविधियों को आर्थिक और रणनीतिक सहायता प्रदान कर रहा था।


यह कार्रवाई पंजाब पुलिस, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस (RMP) के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मलेशिया से डिपोर्ट किए गए गुरविंदर सिंह (अंबाला) और मनजीत सिंह (पटियाला) को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद दोनों को पटियाला की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।


जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी मलेशिया में बैठकर प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के लिए वित्तीय लेनदेन, संपर्क और लॉजिस्टिक सहायता का संचालन कर रहे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी खातों के माध्यम से पंजाब में सक्रिय आतंकियों तक धन पहुंचाने और विभिन्न आतंकी साजिशों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


रेलवे फ्रेट कॉरिडोर पर हमलों से शुरू हुई जांच


पूरे मामले की शुरुआत इस वर्ष पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाकर किए गए दो बड़े आतंकी हमलों से हुई। 23 जनवरी 2026 को फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद के निकट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर एक आईईडी विस्फोट किया गया। इस धमाके में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हुआ और मालगाड़ी का संचालन प्रभावित हुआ। जांच एजेंसियों ने इसे देश के महत्वपूर्ण आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हमला मानते हुए गंभीरता से लिया। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को पटियाला जिले के शंभू क्षेत्र में उसी फ्रेट कॉरिडोर पर एक और विस्फोट की कोशिश की गई। पंजाब पुलिस ने इस साजिश को विफल कर दिया। जांच के दौरान एक संदिग्ध हमलावर की मौत हुई और इसके बाद पुलिस को पूरे आतंकी मॉड्यूल तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।


इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके कब्जे से आरपीजी लॉन्चर, आईईडी, आरडीएक्स, हैंड ग्रेनेड, अत्याधुनिक पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। बरामद हथियारों ने स्पष्ट संकेत दिया कि यह कोई छोटा मॉड्यूल नहीं था, बल्कि बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की तैयारी कर रहा था।


जांच में सामने आया मलेशिया कनेक्शन


शुरुआती जांच के दौरान पुलिस का ध्यान केवल हमलावरों तक सीमित था, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संचार नेटवर्क की जांच ने पूरी कहानी बदल दी। जांच में सामने आया कि इस आतंकी मॉड्यूल का संचालन केवल पंजाब तक सीमित नहीं था। इसके तार मलेशिया तक जुड़े हुए थे, जहां बैठे कुछ लोग पूरे नेटवर्क की आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।


पंजाब पुलिस के अनुसार गुरविंदर सिंह और मनजीत सिंह विदेशी खातों के जरिए आतंकी फंड पंजाब भेजते थे। इसी धन का इस्तेमाल हथियार खरीदने, विस्फोटक जुटाने, नए लोगों की भर्ती करने और आतंकी हमलों की योजना बनाने में किया जाता था। आधुनिक आतंकवादी संगठन अक्सर ऐसे लोगों पर निर्भर रहते हैं जो सीधे हमलों में शामिल नहीं होते, लेकिन धन, संसाधन और संपर्क उपलब्ध कराकर पूरे नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखते हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस गिरफ्तारी को पूरे आतंकी ढांचे पर एक बड़ा प्रहार मान रही हैं।


भारत और मलेशिया के सहयोग की अहम मिसाल


इस पूरे ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता भारत और मलेशिया के बीच सुरक्षा सहयोग रहा। भारतीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के आधार पर रॉयल मलेशिया पुलिस ने दोनों आरोपियों का पता लगाया और उन्हें हिरासत में लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को भारत भेज दिया गया। यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने के लिए केवल घरेलू कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।


आतंकवाद के खिलाफ बदलती रणनीति


यह मामला भारत की बदलती आतंकवाद विरोधी रणनीति को भी दर्शाता है। पहले सुरक्षा एजेंसियां मुख्य रूप से हमलों को अंजाम देने वाले आतंकियों तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब उनका फोकस उन लोगों पर भी है जो विदेशों में बैठकर आतंकियों को धन, तकनीकी सहायता और रणनीतिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं।


दुनिया भर के अनुभव बताते हैं कि यदि किसी आतंकी संगठन की आर्थिक आपूर्ति को रोक दिया जाए, तो उसकी परिचालन क्षमता स्वतः कमजोर हो जाती है। इसी सोच के तहत भारतीय एजेंसियां अब आतंकियों के साथ-साथ उनके वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बना रही हैं।


आगे क्या?


दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां उनके डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों, विदेशी संपर्कों और संचार रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच से कई अन्य विदेशी हैंडलरों, फंडिंग चैनलों और पंजाब में सक्रिय आतंकी मॉड्यूलों का खुलासा हो सकता है।

मलेशिया से हुई यह डिपोर्टेशन केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है, जो सीमाओं के पार बैठकर पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा था।


पंजाब पुलिस की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आज आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारों के दम पर नहीं लड़ी जा सकती। इसके लिए आतंकियों तक पहुंचने वाले धन, विदेशी हैंडलरों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को एक साथ ध्वस्त करना आवश्यक है। यदि जांच इसी दिशा में आगे बढ़ती है, तो जून 2026 का यह ऑपरेशन पंजाब पुलिस की सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी उपलब्धियों में से एक के रूप में याद किया जाएगा।

 
 
 

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सरबत दा भला

ਨਾ ਕੋ ਬੈਰੀ ਨਹੀ ਬਿਗਾਨਾ, ਸਗਲ ਸੰਗ ਹਮ ਕਉ ਬਨਿ ਆਈ ॥
"कोई मेरा दुश्मन नहीं है, कोई अजनबी नहीं है। मैं सबके साथ मिलजुलकर रहता हूँ।"

ईमेल : admin@sikhsforindia.com

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